इंदौर वजन ज्यादा होना या बहुत कम होना हर दूसरे व्यक्ति की कहानी है। इसके लिए हर किसी को बहुत कुछ सुनना पड़ता है। कई लोग इस बात का मजाक बनाते हैं, ताने देते हैं। हर व्यक्ति की अपनी कद-काठी, रंग-रूप है। क्यों बच्चों के मन में भी बार्बीडाल, सिंड्रेला आदि की छवि ‘जीरो साइज’ की बनाई जाती है। क्यों उन्हें मोटा नहीं बनाया जाता। भारत तो क्या बल्कि दुनिया में कहीं भी वयस्क व्यक्ति ‘जीरो साइज’ की बात पर खरा नहीं उतरता, बच्चों की बात अलग है। पुरानी फिल्मों की नायिकाएं तो ऐसी नहीं होती थीं, फिर भी वे पूरी दुनिया पर छाई रही तो आज दुबली लड़की की बात क्यों की जाती है। जरूरत है तो अपने गुणों से अपनी पहचान बनाने की, सपनों को साकार करने की।