वन अमले ने पाया कि करीब 4 वर्ष का नर तेंदुआ अर्ध बेहोशी की हालत में धीरे-धीरे गुर्रा तो रहा है, लेकिन वह चल फिर नहीं पा रहा था। उन्होंने बताया कि तेंदुए के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट के निशान नहीं पाए गए। वन अमला वयस्क तेंदुए के समीप करीब आधे घंटे तक नहीं गया। उन्होंने बताया कि ट्रेंकुलाइजर आदि की व्यवस्था नहीं होने के चलते इंदौर स्थित रालामंडल की टीम को सूचित किया गया।

इस बीच वन अमले ने तेंदुए का ऊर्जा स्तर अत्यंत कम हो जाने के बाद उसे पिंजरे में पहुंचाने में सफलता प्राप्त की और वन परिक्षेत्र कार्यालय पानसेमल में पहुंचाया। वहां पशु चिकित्सकों ने उसे दवाइयों का घोल देने की कोशिश की, लेकिन तेंदुए ने शुरुआती दौर में इन्हें नहीं लिया और न ही किसी प्रकार का भोज्य पदार्थ ग्रहण किया। करीब पांच घंटे तक तरल दवाइयां देने के बाद तेंदुए की स्थिति में सुधार आया। उन्होंने कहा कि शेड्यूल एक के वन्य प्राणी होने के चलते घटना के बारे में भोपाल स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) को पत्र लिखकर सूचित किया गया है।