चीता स्टेट बना मध्यप्रदेश, 53 चीतों से दुनिया चौंकी
भूमिका
मध्यप्रदेश अब केवल टाइगर स्टेट या लेपर्ड स्टेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘चीता स्टेट’ के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है। अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बड़ा संदेश दिया कि प्रदेश आज वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का वैज्ञानिक रोल मॉडल बन चुका है।
चीता स्टेट की इस पहचान ने मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों पहले देश से समाप्त हो चुके चीतों को फिर से प्रदेश की धरती पर बसाना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया और जैव-विविधता संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुए।
चीता स्टेट के रूप में बढ़ी मध्यप्रदेश की पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के पास टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, वल्चर स्टेट, घड़ियाल स्टेट और वुल्फ स्टेट जैसे कई महत्वपूर्ण दर्जे हैं। अब चीता स्टेट के रूप में प्रदेश ने एक और नई उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का अवसर दिया, जिसके लिए प्रदेश आभारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पालपुर कूनो और गांधी सागर अभयारण्य में चीते अब पूरी तरह से अनुकूल हो चुके हैं और इन क्षेत्रों को अपना घर मान चुके हैं।
प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 53 चीते मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या भारत में जन्मे चीतों की है। यह उपलब्धि वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों की मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।
मुख्य तथ्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव-विविधता के मामले में देश का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। प्रदेश में 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, करीब 500 पक्षियों की प्रजातियां और 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के जंगलों में अब 100 से अधिक हाथी भी विचरण कर रहे हैं। इसके अलावा दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए और 53 घड़ियाल कूनो नदी में छोड़े गए हैं।
हलाली डेम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है। लगभग 100 साल बाद जंगली भैंसे की पुनर्स्थापना भी प्रदेश में की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबल और कूनो नेशनल पार्क में घड़ियाल संरक्षण तेजी से चल रहा है। मां नर्मदा से जुड़े मगरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आईआईएफएम में हुआ बड़ा आयोजन
भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम और चीता संरक्षण मीडिया वर्कशॉप आयोजित हुई। इसमें वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल जैव-विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा।
इस दौरान भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026, चीता संरक्षण ब्रोशर और अन्य प्रचार सामग्री का विमोचन किया गया। साथ ही 5 रुपए का ‘माय स्टैम्प’ डाक टिकट भी लॉन्च किया गया।
आईआईएफएम में नव स्थापित डेटा ड्रिवन लैब का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में कई लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ, जिनमें जैव-विविधता विरासत स्थलों और बिग कैट्स संरक्षण पर विशेष फोकस रहा।
वन विभाग को मिली नई सुविधाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और केंद्रीय वन मंत्री ने वन विभाग के मैदानी अमले के लिए नई बाइक्स और रेस्क्यू व्हीकल्स को हरी झंडी दिखाई।
सरकार का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण कार्य को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है। जंगलों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों में घायल या बीमार वन्यजीवों का तत्काल उपचार किया जा सकेगा। इससे वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।
जल संरक्षण पर भी बड़ा फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रही है। गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महाअभियान चलाया जा रहा है।
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 3000 करोड़ रुपये की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है।
प्रदेश में 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब और 212 नदियों में साफ-सफाई के कार्य किए गए हैं। इस अभियान में 18 लाख लोगों ने भागीदारी की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 2 लाख से अधिक जलदूत बनाए गए हैं और एक हजार अमृत सरोवर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
भूपेन्द्र यादव ने क्या कहा
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि जैव-विविधता भारतीय सभ्यता की आत्मा है। इसे बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता पर्यावरण संरक्षण की दिशा में दुनिया के सामने एक उदाहरण बन चुका है। भारत में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ नदियों और जंगलों के संरक्षण पर भी तेजी से काम हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है। वर्ष 2030 तक इसे पूरी तरह हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि हिमालय से लेकर थार और सुंदरवन तक भारत की जैव-विविधता हमारी सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है।
चीता संरक्षण बना दुनिया में चर्चा का विषय
कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि भारत में वर्ष 1952 में चीते समाप्त हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2009 से पुनर्वास की दिशा में प्रयास शुरू किए गए।
वर्ष 2021 में प्रोजेक्ट चीता का एक्शन प्लान तैयार हुआ और 2022 में नामीबिया से पहली बार चीते कूनो लाए गए।
इसके बाद 2023 और 2026 में भी चीते मध्यप्रदेश पहुंचे। इस साल 18 नए चीतों का जन्म हुआ है।
भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ भी शावकों को जन्म दे चुकी है। वर्तमान में कुल 53 चीतों में से 33 भारत में जन्मे हैं।
इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस पर जोर
इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस के डायरेक्टर जनरल डॉ. एस.पी. यादव ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है।
उन्होंने बताया कि दुनिया में पाए जाने वाले बिग कैट्स के संरक्षण के लिए कई देशों को साथ जोड़ा जा रहा है। अब तक 25 देश इस अलायंस से जुड़ चुके हैं।
भारत में बिग कैट्स प्रोजेक्ट 9 अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था। 12 मई 2024 को अलायंस की स्थापना हुई।
उन्होंने कहा कि दुनिया में चीतों की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भारत आज चीता संरक्षण में अग्रणी देश के रूप में उभरा है।
महत्वपूर्ण बिंदु
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब किंग कोबरा और गैंडा लाने की तैयारी भी की जा रही है।
वन विभाग हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन जारी करने जैसे नए प्रयोग कर रहा है।
प्रदेश के जंगलों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं।
जल, जंगल और जमीन की उर्वरता बचाने में मध्यप्रदेश को देश में नंबर वन बताया गया।
कार्यक्रम में जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की गई।
विश्लेषण

मध्यप्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने उसे राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। चीता स्टेट के रूप में मिली पहचान केवल एक उपाधि नहीं बल्कि संरक्षण मॉडल की सफलता का संकेत है।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्स्थापन लंबे समय तक चुनौती माना जाता रहा, लेकिन अब यह सफलता का उदाहरण बन चुका है।
प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण, जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण को एक साथ जोड़कर कार्य किया जा रहा है। इससे पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
वन विभाग की नई रणनीतियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है, जिससे संरक्षण कार्यों को सामाजिक समर्थन मिल रहा है।
प्रभाव
चीता स्टेट की पहचान से मध्यप्रदेश की वैश्विक छवि मजबूत हुई है। इससे वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता के क्षेत्र में प्रदेश को नई पहचान मिली है।
कूनो और गांधी सागर जैसे क्षेत्रों में संरक्षण गतिविधियां बढ़ने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
जल संरक्षण अभियान और जैव-विविधता कार्यक्रमों से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है।
वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर और नई सुविधाओं से वन विभाग की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
भविष्य की दिशा
प्रदेश सरकार आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जंगलों के आसपास रेस्क्यू सेंटर बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जल संरक्षण, जैव-विविधता और वन संरक्षण को एक साथ जोड़कर दीर्घकालिक योजना तैयार की जा रही है।
किंग कोबरा और गैंडा जैसे वन्यजीवों को लाने की तैयारी से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश जैव-विविधता के दायरे को और विस्तारित करना चाहता है।
स्थानीय लोगों, महिला समूहों और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
निष्कर्ष

मध्यप्रदेश ने चीता स्टेट के रूप में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। 53 चीतों की मौजूदगी केवल संख्या नहीं बल्कि एक सफल संरक्षण अभियान का परिणाम है।
जैव-विविधता, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
आने वाले समय में यदि यही गति बनी रही तो मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े मॉडल के रूप में और मजबूत होकर सामने आ सकता है।
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