अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम ने बदली सोच, बच्चों को मिली प्रेरणा
भूमिका
अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्वालियर में बाल गृह के बच्चों के साथ विभिन्न शैक्षणिक, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत मेरा युवा भारत (माय भारत) केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना रहा।
सत्र 2026-27 के तहत 15 जून से 19 जून 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में श्री शिवाजी शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति के अंतर्गत संचालित मां कैला देवी बालिका गृह के बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की थीम “लर्निंग, केयरिंग एवं इंस्पायरिंग” रखी गई, जिसके माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखा गया।
अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों को केवल जानकारी प्रदान करना नहीं बल्कि उन्हें सीखने, समझने और अपने व्यक्तित्व को विकसित करने का अवसर देना था।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराया गया जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकें, अपने विचार साझा कर सकें और भविष्य के लिए बेहतर दृष्टिकोण विकसित कर सकें।
युवा स्वयंसेवकों ने बच्चों के साथ समय बिताते हुए उन्हें सकारात्मक सोच और लक्ष्य निर्धारण के लिए प्रेरित किया।
प्रथम दिवस की गतिविधियां
कार्यक्रम के प्रथम दिवस बच्चों के साथ संवाद एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनकी रुचियों, सपनों, शिक्षा तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।
बच्चों को अपनी आकांक्षाओं के बारे में खुलकर बोलने का अवसर मिला। संवाद आधारित इस गतिविधि ने बच्चों और स्वयंसेवकों के बीच आत्मीय संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवा स्वयंसेवकों ने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य तय करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
द्वितीय दिवस पर खेलकूद गतिविधियां

कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न खेलकूद गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों ने उत्साह के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया और टीम भावना का प्रदर्शन किया।
खेलों के माध्यम से अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सहयोग की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
इस दौरान बच्चों को सामूहिक सहभागिता का महत्व समझाया गया तथा खेलों के जरिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया गया।
प्रकृति संरक्षण विषय पर रचनात्मक पहल
कार्यक्रम के तृतीय दिवस “प्रकृति संरक्षण” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस गतिविधि में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को अपनी कल्पनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर मिला।
प्रतियोगिता के दौरान प्रस्तुत चित्रों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता दिखाई दी।
पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन
चित्रकला प्रतियोगिता के साथ पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। बच्चों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस अवसर पर सभी बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और पौधों की देखभाल का संकल्प लिया।
यह गतिविधि केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
जिला युवा अधिकारी ने क्या कहा
मेरा युवा भारत केंद्र, ग्वालियर की जिला युवा अधिकारी श्रीमती अंजली कुमारी ने कहा कि अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास, रचनात्मक क्षमता और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को सीखने के साथ-साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।
उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक होती हैं।
युवा मंडल अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
सफल युवा मंडल के अध्यक्ष श्री अरविंद कुशवाह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे में असीम संभावनाएं होती हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और अवसर प्रदान किए जाने की आवश्यकता है ताकि वे अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा स्वयंसेवकों के सहयोग से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में श्रीमती कीर्ति परमार, गंगा प्रजापति और ज्योति चौहान सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
स्वयंसेवकों ने बच्चों के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।
उनकी सहभागिता से कार्यक्रम के विभिन्न चरणों का प्रभावी संचालन संभव हो सका।
कार्यक्रम में रही व्यापक उपस्थिति

इस आयोजन में बाल गृह के अधिकारी एवं कर्मचारी, मेरा युवा भारत केंद्र के पदाधिकारी, स्वयंसेवक तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित लोगों ने बच्चों के साथ आयोजित गतिविधियों का अवलोकन किया और कार्यक्रम के उद्देश्यों की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान सामूहिक सहभागिता का वातावरण देखने को मिला।
अनुभवात्मक शिक्षण और व्यक्तित्व विकास
अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम में आयोजित गतिविधियों का केंद्र बच्चों का व्यक्तित्व विकास रहा। संवाद, खेलकूद, चित्रकला और पौधारोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न अनुभव प्राप्त हुए।
इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी रुचियों को पहचानने और उन्हें अभिव्यक्त करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की थीम के अनुरूप सीखने, प्रेरणा प्राप्त करने और देखभाल की भावना को प्रोत्साहित किया गया।
निष्कर्ष
ग्वालियर में आयोजित अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम ने बालिका गृह के बच्चों को सीखने, संवाद करने, खेलकूद में भाग लेने और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के विभिन्न चरणों ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऐसे आयोजन बच्चों को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अपने सपनों और लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
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