Mahalaxmi Puja 2022 : सुख-समृद्धि लेकर आज होगा ज्येष्ठा-कनिष्ठा गौरी का आगमन

Mahalaxmi Puja 2022 :महाराष्ट्रीयन परिवारों में कुल परंपरानुसार होगी महालक्ष्मी की स्थापना, महालक्ष्मी के आगमन से गणेशोत्सव का उल्लास तीन दिनों के लिए होगा दोगुना।

Mahalaxmi Puja 2022 : इंदौर महाराष्ट्रीयन परिवारों के उन घरों में गणेशोत्सव का उल्लास शनिवार को दोगुना हो जाएगा, जहां कुल परंपरानुसार गणेश चतुर्थी के तीसरे दिन महालक्ष्मी की स्थापना की जाती है। सुबह से शाम तक विभिन्न शुभ मुहूर्त में ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी का आह्वान थालियां बजाते हुए पदचिह्न हल्दी और कुमकुम के छापे बनाते हुए किया जाएगा। इस दौरान महालक्ष्मी आली सोन्याचा पायानी के जयघोष लगाए जाएंगे।

सूर्यदेव नगर निवासी राखी सुपेकर और कृष्णा सुपेकर ने बताया कि यह उत्सव 3 से 5 सितंबर तक मनाया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि दो बहनें ज्येष्ठा और कनिष्ठा गौरी अपने मायके बच्चों के साथ आती हैं। इनका स्वागत सत्कार जैसे एक बेटी का होता है, वैसे ही किया जाता है। सुंदर पंडाल बनाकर उन्हें विराजित किया जाता है। दूसरे दिन रविवार को उनकी खूब खातिरदारी की जाएगी। विशेष श्रृंगार कर पूरण पोळी और सोलह प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। शाम को महिलाएं हल्दी, कुमकुम का कार्यक्रम करती हैं। ब्राह्मण व सुहागिनों को भोजन कराया जाता है। आस्था रखने वाले लोग इनके दर्शन करने आते हैं। इस दौरान नाते-रिश्तेदार और स्नेहजन को भोजन पर आमंत्रित किया जाता है। तीसरे दिन मंगलवार को इनकी विदाई होगी।। विदाई आरती के बाद सुख-समृद्धि की कामना कर की जाएगी।

महालक्ष्मी को विराजित करने के लिए सिंहगढ़ के किले की प्रतिकृति बनाई

महालक्ष्मी को जहां विराजित किया जाता है, उस स्थान पर आकर्षक साज-सज्जा की जाती है। भवानीपुर निवासी माधवी एकतारे बताती हैं कि उन्होंने महालक्ष्मी की स्थापना के लिए सिंहगढ़ के किले की प्रतिकृति 30 वर्गफीट में बनाई है। शिवाजी महाराज का यह किला मराठा गौरव का प्रतीक है। यह किला तानाजी मालुसरे की वीरता का प्रतीक है। इसके साथ ही माता का मनोहारी श्रृंगार और विद्युत सज्जा भी की जा रही है। शनिवार को शुभ मुहूर्त में उनका आह्वान होगा।

ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा पूजन

ज्योतिर्विद विनीत त्रिपाठी के अनुसार, महाराष्ट्रीयन पंचांग के मुताबिक 3 सितंबर शनिवार को महालक्षमी का आह्वान होगा। इस दिन रात 10.57 से अगले दिन 4 सितंबर को रात 9.43 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा। शनिवार को उनके आह्वान के लिए श्रेष्ठ समय दोपहर 3.34 से शाम 5.08 बजे तक है। अगले दिन 4 सितंबर को ज्येष्ठा गौरी को छप्पन भोग लगाकर पूजन किया जाएगा। इसके बाद सोमवार को ज्येष्ठा गौरी का विसर्जन होगा।

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