CG News : छत्तीसगढ़ में 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को चाहिए सस्ती किताबों का विकल्प

विद्यार्थियों को सरकार 10वीं तक ही निश्शुल्क में सरकारी पुस्तक उपलब्ध कराती है, फिर 11वीं-12वीं लिए खुद के खर्च में पुस्तक लेनी पड़ती है।

रायपुर (राज्य ब्यूरो)। राज्य में पहली से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए तो राज्य सरकार निश्शुल्क किताबें उपलब्ध करा रही है। मगर इसके बाद हायर सेकेंडरी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए पठन-पाठन कार्य मुश्किल हो गया है। प्रदेश के सवा सात लाख विद्यार्थियों को बाजार से महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हंै।

प्रदेश के 54 लाख विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम से हर वर्ष निश्शुल्क किताबें मिल रही हैं। इसके लिए निगम 176.76 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को राज्य सरकार के प्रविधान के अनुसार किताबें निश्शुल्क नहीं मिलती हैं, मगर निजी प्रकाशकों की मोनोपली और मनमानी रेट से विद्यार्थियों को बचाने के लिए सस्ती किताबों को विकल्प भी नहीं मिल रहा है।

वर्ष 2018 में भाजपा सरकार के समय तत्कालीन अफसरों ने हजारों की संख्या में 11वीं-12वीं की किताबें छपवाई थीं। इनमें कुछ किताबें उन विषयों की भी थीं, जिनके यहां विद्यार्थी न के बराबर हैं। ये किताबेें वितरित न होकर निगम के डिपो में भी बर्बाद हो रही हैं। विश्ोषज्ञों का कहना है कि ये किताबें अब विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं रह गई हैं। करीब नौ करोड़ रुपये की किताबों को खपाने के लिए निगम के पास अब कोई विकल्प भी नहीं बचा है।

इधर, कांग्रेस सरकार में निगम ने इस वर्ष 11वीं-12वीं की अपडेट किताबें प्रकाशित ही नहीं की हैं। नतीजा यह हो रहा है कि 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदना मजबूरी हो गई है। पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से प्रकाशित किताबें जहां 150 से 200 रुपये में मिलती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से लेकर 600 रुपये में मिल रही हंै। ऐसे में गरीब और पिछड़े वर्ग के अभिभावकों को विद्यार्थियों की उच्च स्तर की स्कूली पढ़ाई कराना मुश्किल हो गया है।

भाषा की किताबों के लिए भटक रहे 11वीं-12वीं के विद्यार्थी
11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को बाजार में रोजाना किताब के लिए भटक रहे हैं, जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है किंतु अभी तक हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों के पास हिंदी और अंग्रेजी की किताब नहीं है। इस कक्षा में बाकी किताबें तो एनसीईआरटी आधारित हैं, मगर हिंदी और अंग्रेजी स्थानीय विषय होने के कारण इसकी किताबें इस बार निगम ने नहीं प्रकाशित की हैं। विद्यार्थियों को सरकार 10वीं तक ही निश्शुल्क में सरकारी पुस्तक उपलब्ध कराती है, फिर 11वीं-12वीं लिए खुद के खर्च में पुस्तक लेनी पड़ती है। इसके लिए निगम की ओर प्रकाशित किताबें कम दाम में मिलती हैं।
कम पड़ गईं किताबें
राज्य में राज्य श्ौक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद किताब लेखन का काम करता है और किताब प्रकाशन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के पास है। प्रदेश में 16 जून से सभी स्कूल खुल गए हैं मगर कई जिलों में किताबों के लिए अभी भी जिला शिक्षा अधिकारी मांग पत्र भेज रहे हैं। कितने विद्यार्थियों को किताब चाहिए, इसका प्रबंधन कर पाने में विभाग नाकाम रहा है।
शिक्षा संचालनालय से किताबों को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है। ऐसे में किताबें प्रकाशित नहीं हो पाईं। हिंदी-अंग्रेजी की किताबें इस वर्ष प्रकाशित नहीं हो पाई हैं। यह बात सही है कि वर्ष 2018 में प्रकाशित किताबें खराब हो रही हैं।
– अरविंद पांडेय, महाप्रबंधक, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम
जहां-जहां किताबों की मांग आती है, वहां के लिए निगम को प्रस्ताव भेजते हैं। सस्ती और समय पर किताबें देने के लिए विभाग प्रयास करता है। कुछ ही जगहों पर विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पाई हैं।
– सुनील कुमार जैन, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

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