नारी सशक्तिकरण: 1.25 करोड़ महिलाओं तक पहुंची योजनाएँ
भूमिका
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए गए प्रयास एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आए हैं। प्रदेश में महिलाओं, किशोरी बालिकाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और आर्थिक विकास को केंद्र में रखकर कई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं के परिणामस्वरूप नारी सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में शामिल किया है। बच्चों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और नवाचारों को लागू किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक महिला कल्याण और नारी सशक्तिकरण की अवधारणा को पहुंचाना है।
मध्यप्रदेश में चल रही योजनाओं और कार्यक्रमों के परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। आंगनवाड़ी सेवाओं के विस्तार, पोषण कार्यक्रमों के सुदृढ़ क्रियान्वयन, आर्थिक सहायता योजनाओं और महिला सुरक्षा तंत्र के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को एक मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है।
मुख्य तथ्य
प्रदेश में नारी सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। 453 एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 97,882 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 84 लाख हितग्राहियों को सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। यह व्यवस्था नारी सशक्तिकरण के साथ-साथ बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को भी मजबूत कर रही है।
आंगनवाड़ी केंद्रों में जियो-फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आई है। इसके साथ ही प्रदेश कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 कार्यक्रम के लिए 3,768 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस कदम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल रही है और नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार तैयार हो रहा है।
महत्वपूर्ण बिंदु
पोषण 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत मातृ एवं शिशु पोषण की निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर ऐप का उपयोग किया जा रहा है। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्रदेश की सभी आंगनवाड़ियों की मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है।
प्रदेश में फेस मैचिंग प्रणाली के माध्यम से 94 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन किया जा चुका है। यह उपलब्धि देश में प्रथम स्थान पर मानी जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।
पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के अंतर्गत टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना से 60 लाख से अधिक बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। इस पहल से नारी सशक्तिकरण को सामाजिक और स्वास्थ्य के स्तर पर मजबूती मिल रही है।
विस्तृत जानकारी
प्रदेश में मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2025 में पंजीकृत 7.37 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर पर लाया गया। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
झाबुआ जिले में शुरू किए गए “मोटी आई” नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस नवाचार ने नारी सशक्तिकरण और बाल पोषण के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाई है।
प्रदेश में 5,263 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण प्रगति पर है। इसके साथ ही 38,900 आंगनवाड़ी भवनों में विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। भवन निर्माण, उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों के लिए 704 विशेष आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत किए गए हैं। यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में नारी सशक्तिकरण और बाल विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रदेश वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 217 भवनों में से 150 भवनों का निर्माण पूरा कर देश में प्रथम स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि प्रशासनिक दक्षता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण है।
मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना वर्तमान में प्रदेश की सबसे बड़ी डीबीटी योजना बन चुकी है। इस योजना के अंतर्गत 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। यह पहल नारी सशक्तिकरण को आर्थिक आधार प्रदान करती है।
जून 2023 से फरवरी 2026 तक इस योजना के माध्यम से 52,305 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना भी प्रदेश में बालिकाओं के विकास और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योजना बन चुकी है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 52.56 लाख बालिकाओं का पंजीयन किया जा चुका है। इसके लिए 1,801 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की गईं, जिनमें लाखों नागरिकों ने सहभागिता की। इस अभियान ने समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विश्लेषण
प्रदेश में लागू की गई योजनाओं का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि नारी सशक्तिकरण को केवल सामाजिक कार्यक्रम के रूप में नहीं बल्कि विकास की व्यापक रणनीति के रूप में अपनाया गया है। स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आर्थिक सहायता के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत प्रदेश लगातार अग्रणी रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 386 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है जिससे मातृ स्वास्थ्य में सुधार होता है।
प्रदेश में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं, जबकि 8 नए केंद्रों की स्वीकृति मिली है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को संकट की स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान की जाती है। यह व्यवस्था नारी सशक्तिकरण के सुरक्षा आयाम को मजबूत करती है।
महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से इस वर्ष 1.43 लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सहायता तंत्र सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
भोपाल और इंदौर में सखी निवास संचालित हैं और 8 नए वर्किंग वूमन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इससे कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
प्रभाव

इन सभी योजनाओं और पहलों का प्रभाव समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और वे परिवार तथा समाज के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए गए प्रयासों से महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएँ आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय हो रही हैं।
मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से हजारों स्व-सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को आर्थिक सहायता और ब्याज अनुदान प्रदान किया गया है। इससे महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 32,730 करोड़ 45 हजार रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है। यह बजट राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि नारी सशक्तिकरण को विकास की मुख्य धारा में रखा गया है।
भविष्य की दिशा
भविष्य में प्रदेश सरकार नारी सशक्तिकरण को और अधिक मजबूत करने के लिए योजनाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और आधारभूत सुविधाओं के विकास के माध्यम से योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण और विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ और बेहतर होंगी।
आर्थिक सहायता योजनाओं के विस्तार से महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वे समाज में सशक्त भूमिका निभा सकेंगी।
नारी सशक्तिकरण की यह यात्रा केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज की सोच में बदलाव का भी प्रतीक बन रही है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण को लेकर किए गए प्रयासों ने एक सकारात्मक बदलाव की दिशा दिखाई है। स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहायता के माध्यम से महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
राज्य में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
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महिलाओं के सशक्त भविष्य और समाज के संतुलित विकास के लिए नारी सशक्तिकरण की यह यात्रा आगे भी जारी रहनी चाहिए।
