अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में बिलासपुर एटीएल का दिव्यांग रथ करेगा देश का प्रतिनिधित्व

नीति आयोग से एटीएल पहुंचा पत्र, एटीएल प्रभारी व बाल विज्ञानी होंगे शामिल

बिलासपुर नीति आयोग 21 से 23 सितंबर तक बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी लगा रहा है। इसमें 20 देशों के विज्ञान माडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसमें देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए एकमात्र माडल दिव्यांग रथ का चयन किया गया है। इसे बिलासपुर के गवर्नमेंट स्कूल के बाल विज्ञानियों ने तैयार किया है। दिव्यांग रथ को तैयार करने वाले बाल विज्ञानी तरुण सागर और तरुण मैत्री ही इसे प्रदर्शित भी करेंगे।

दिव्यांगों के लिए बहुपयोगी उपकरण है, जिसकी मदद से यदि किसी बच्चों को लघुशंका की जरूरत पड़ती है तो दाहिने हत्थे पर लगा बटन दबाना होता है। इससे चेयर का निचला हिस्सा खुल जाता है। शटर सिस्टम से यह काम करता है। फ्रेश होने के बाद बटन दबाने से वह बंद हो जाता है और फिर वह स्टडी चेयर बन जाता है। ह्वीलचेयर में छोटे-छोटे चक्के लगाए गए हैं, जिनके जरिए रथ को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है।

लैब के विज्ञानियों ने प्रदेश के दिव्यांग बच्चों का सर्वे किया। इससे पता चला कि यहां 400 से अधिक बच्चे हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चों को अभिभावक इसीलिए स्कूल नहीं भेजते क्योंकि उन्हें प्रसाधन में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। दिव्यांग रथ से यह आसान हो जाएगा। शासकीय बहुद्देशीय स्कूल बिलासपुर की एटीएल (अटल टिंकरिंग लैब ) के बाल विज्ञानी ने दिव्यांग रथ तैयार किया है। ये दिव्यांगों के प्रसाधन को लेकर असुविधा को दूर करने के साथ बहुपयोगी साबित हो रहा है। खास बात ये यह रथ जीपीएस सिस्टम से लैस है।

दूसरा प्रोजेक्ट जिसका होगा व्यावसायिक उपयोग

नीति आयोग ने दिव्यांग रथ के व्यावसायिक उपयोग के लिए हरी झंडी दे दी है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान जब कार्यालय से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में ताला जड़ा हुआ था, उस दौर में बाल विज्ञानियों ने कमाल का आविष्कार किया। टूटी ह्वीलचेयर, स्कूल के कबाड़ में रखे गत्ता, प्लास्टिक की बोतल से लेकर टिन व लकड़ियों को इकठ्ठा कर दिव्यांग रथ बनाना शुरू किया। तीन महीने की मेहनत के बाद रथ तैयार हो गया।

इसके बाद इसका वर्चुअल प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान नीति आयोग के विशेषज्ञ अफसरों की टीम मौजूद थी। विज्ञानियों ने बाल विज्ञानियों के इस आविष्कार की सराहना की। आयोग के अधिकारियों ने परीक्षण के बाद इसके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी दे दी है। इसके पहले आयोग ने अटल कृषि यंत्र के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी थी। डेल कंपनी व एलएलएफ ने कृषि यंत्र का निर्माण पूरा कर लिया है। जल्द ही इसे बाजार में लाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात

नीति आयोग का पत्र प्राप्त हुआ है। बेंगलुरु में होने वाली अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में दिव्यांग रथ का चयन किया गया है। देश के साथ ही छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

डा. धनन्जय पांडेय, प्रभारी अटल टिंकरिंग लैब आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल

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