समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को बराबरी का हक उपलब्ध कराना है – प्रो. गोपाल शर्मा
भूमिका
ग्वालियर – समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिये गठित उच्च स्तरीय समिति की जन परामर्श बैठक गुरुवार को बाल भवन के सभागार में आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि देश में वर्तमान में दो दर्जन से अधिक ऐसे कानून हैं जिसमें एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है।
मुख्य तथ्य
बाल भवन के सभागार में आयोजित जन परामर्श बैठक में उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री अनूप नायर, श्री बुधपाल सिंह, सुश्री शोभा पेठणकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के संबंध में नागरिकों के विचार जानना और सुझाव प्राप्त करना था।
प्रो. गोपाल शर्मा ने बताया कि समान नागरिक संहिता का संबंध परिवार से जुड़े कानूनों जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और पारिवारिक अधिकारों से है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, लेकिन पारिवारिक मामलों में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिसके कारण समान परिस्थितियों में अलग-अलग कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
उच्च स्तरीय समिति के अनुसार प्रदेशभर में लोगों से संवाद स्थापित करने के लिए लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। समिति के समक्ष प्रदेशभर से 10 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इन सुझावों के आधार पर समिति अपनी रिपोर्ट विधि विभाग को सौंपेगी, जिसके बाद कानून का मसौदा तैयार किया जाएगा।
समिति की सदस्य सुश्री शोभा पेठणकर ने कहा कि समान नागरिक संहिता का इतिहास काफी पुराना है और आजादी से पहले भी इसका प्रारूप तैयार किया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। वर्तमान में नागरिकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।
विस्तृत जानकारी
बैठक में विधायक भितरवार श्री मोहन सिंह राठौर ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से पूरे देश में सभी के लिए समान कानून उपलब्ध होगा और यह देश के विकास में उपयोगी साबित होगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से चर्चा कर कानून बनाने की प्रक्रिया को प्रशंसनीय बताया।
विधायक श्री साहब सिंह गुर्जर ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता के लिए सुझाव लेने की प्रक्रिया में शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश में सभी के लिए एक जैसा कानून होना चाहिए।
संत कृपाल सिंह ने कहा कि सभी धर्म समान व्यवहार और अधिकार की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनों में एकरूपता राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करेगी।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जानकारी दी कि ग्वालियर जिले में विभिन्न माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न समूहों से चर्चा कर सुझाव प्राप्त किए गए हैं। ग्वालियर जिले में 35 हजार से अधिक नागरिकों ने समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने सुझाव दिए हैं, जिनमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह ने कहा कि देश में अधिकांश कानून सभी के लिए समान हैं, लेकिन सामाजिक, पारिवारिक और विरासत संबंधी मामलों में विभिन्न प्रावधान लागू हैं। समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी के लिए समान कानून उपलब्ध होगा।
बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। समिति के सदस्यों ने प्राप्त सुझावों को एकत्र कर उन पर विचार करने की बात कही।
विश्लेषण
जन परामर्श बैठक में प्राप्त सुझावों से यह स्पष्ट हुआ कि समान नागरिक संहिता को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों के विचार जानने की प्रक्रिया जारी है। समिति द्वारा प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर संवाद स्थापित कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं। बैठक में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों की भागीदारी इस प्रक्रिया को व्यापक स्वरूप प्रदान करती है।
प्रभाव
बैठक में व्यक्त विचारों के अनुसार समान नागरिक संहिता लागू होने की स्थिति में पारिवारिक कानूनों में एकरूपता स्थापित हो सकती है। साथ ही राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भविष्य की दिशा
उच्च स्तरीय समिति द्वारा नागरिकों से प्राप्त सुझावों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट विधि विभाग को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे कानून का मसौदा तैयार किया जाएगा।
निष्कर्ष
ग्वालियर में आयोजित जन परामर्श बैठक में समान नागरिक संहिता को लेकर व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को समिति द्वारा संकलित किया गया है, जिनके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
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