बाल कल्याण: हर थाने में अधिकारी, 24 घंटे में POCSO
भूमिका
ग्वालियर में बाल अधिकारों और बाल संरक्षण व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि हर पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त किए जाएं और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी दिलाया जाए।
डॉ. निवेदिता शर्मा ने सोमवार को ग्वालियर कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय बैठक में बाल अधिकार, बाल संरक्षण व्यवस्थाओं और शासकीय व अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में बच्चों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई।
बाल कल्याण से जुड़े निर्देशों में POCSO अधिनियम के प्रकरणों को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण हर हाल में 24 घंटे के भीतर जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत होना चाहिए।
मुख्य तथ्य
बैठक का प्रमुख विषय बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा रहा। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस थानों में बाल कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति के साथ उन्हें प्रशिक्षित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारी POCSO एक्ट सहित अन्य प्रावधानों के तहत बाल अधिकार संरक्षण में मदद कर सकेंगे। इसके साथ ही POCSO से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के पालन को गंभीरता से लेने के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए गए।
आयोग की अध्यक्ष ने POCSO एक्ट से जुड़े मामलों में पर्याप्त सपोर्ट पर्सन नियुक्त करने के निर्देश जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास को दिए। धारा-4, 5 और 6 के तहत दर्ज प्रत्येक प्रकरण में सपोर्ट पर्सन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
महत्वपूर्ण बिंदु
बैठक में बाल संरक्षण संस्थाओं में रहने वाले सभी बच्चों की नियमित हेल्थ और सुरक्षा ऑडिट पर भी विशेष बल दिया गया। आयोग की अध्यक्ष ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की आवश्यकता बताई।
सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल तथा स्वच्छ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
बच्चों को नशे की प्रवृत्ति से दूर करने के लिए ग्वालियर में रिहैबिटेशन सेंटर शुरू करने के निर्देश संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय को दिए गए। वहीं सहायक श्रम आयुक्त को बाल श्रम रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
विस्तृत जानकारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि सुनने में असमर्थ 6 वर्ष तक के बच्चों को स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के सहयोग से चिन्हित किया जाए। ऐसे बच्चों के कानों में सरकार के खर्चे पर कोक्लियर इम्प्लांट लगवाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और बाल विवाह निषेध से जुड़े विषयों की भी समीक्षा हुई। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत वंचित वर्ग के बच्चों के स्कूलों में प्रवेश की स्थिति पर भी चर्चा की गई।
इसके अलावा बच्चों के पोषण की स्थिति, गुमशुदा बच्चों, शोषित एवं जोखिमग्रस्त बच्चों तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनके पुनर्वास से जुड़े विषयों को भी बैठक में शामिल किया गया।
बाल देखरेख संस्थाओं, स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक का उद्देश्य बच्चों से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं और विभागीय कार्यों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश देना रहा।
विश्लेषण
बैठक में दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि बाल कल्याण से जुड़े मामलों में पुलिस, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक न्याय और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है। हर पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी की नियुक्ति और प्रशिक्षण को इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
POCSO मामलों को 24 घंटे के भीतर जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में रहा। आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेने के लिए कहा।
सपोर्ट पर्सन की पर्याप्त व्यवस्था, विशेष रूप से धारा-4, 5 और 6 के अंतर्गत दर्ज प्रत्येक प्रकरण के लिए, बैठक में स्पष्ट रूप से निर्देशित की गई। इससे संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के पालन पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया।
प्रभाव
बाल संरक्षण संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की हेल्थ और सुरक्षा ऑडिट, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं तथा जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान जैसे विषयों को बैठक में प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों को इन व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बाल श्रम रोकने के लिए सहायक श्रम आयुक्त को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। इसी तरह बच्चों को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने के लिए ग्वालियर में रिहैबिटेशन सेंटर शुरू करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को दी गई।
सुनने में असमर्थ 6 वर्ष तक के बच्चों की पहचान और सरकार के खर्चे पर कोक्लियर इम्प्लांट की व्यवस्था से जुड़ा निर्देश भी बैठक में सामने आया। इसके लिए स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के सहयोग की बात कही गई।
भविष्य की दिशा
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों का समयबद्ध कार्यक्रम के तहत पालन करने के निर्देश दिए।
बैठक में विभिन्न विभागों की मौजूदगी के बीच बच्चों के अधिकारों, संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और देखरेख से जुड़े विषयों की समीक्षा हुई। अब संबंधित अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करने के लिए कहा गया है।
बाल कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं में पुलिस थानों से लेकर बाल देखरेख संस्थाओं, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और छात्रावासों तक अलग-अलग स्तरों पर आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यगण, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यगण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शिवेश बघेल और जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती उपासना राय मौजूद रहीं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम. एस. सागर सहित स्कूल शिक्षा, सामाजिक न्याय और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। सभी संबंधित विभागों के बीच बाल संरक्षण व्यवस्थाओं को लेकर समीक्षा की गई।
निष्कर्ष
ग्वालियर में आयोजित जिला स्तरीय समन्वय बैठक में बाल कल्याण और बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्देश सामने आए। हर पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी की नियुक्ति और प्रशिक्षण, POCSO मामलों को 24 घंटे के भीतर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने तथा सपोर्ट पर्सन की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया।
इसके साथ ही बाल संरक्षण संस्थाओं की हेल्थ व सुरक्षा ऑडिट, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं, बाल श्रम रोकने, बच्चों को नशे से दूर रखने और सुनने में असमर्थ 6 वर्ष तक के बच्चों को चिन्हित करने से जुड़े निर्देश भी दिए गए।
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