सीएनजी प्लांट से 2 करोड़ आय, पवैया भी हुए प्रभावित
भूमिका
ग्वालियर की आदर्श गौशाला लालटिपारा में स्थापित सीएनजी प्लांट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने बुधवार को इस प्लांट का निरीक्षण किया और इसकी कार्यप्रणाली को करीब से देखा।
सीएनजी प्लांट को गाय के गोबर और कचरे से बायो गैस उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश के बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल माना जा रहा है। यही वजह रही कि निरीक्षण के दौरान प्लांट की क्षमता, उत्पादन और उससे हो रही आय पर विशेष चर्चा हुई।
निरीक्षण के समय राज्य वित्त आयोग के सदस्य के के सिंह, सदस्य सचिव वीरेन्द्र कुमार, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सीएनजी प्लांट से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1500 किलोग्राम गैस का उत्पादन हो रहा है। यह उत्पादन नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत बनता दिखाई दे रहा है।
मुख्य तथ्य
सीएनजी प्लांट को नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में स्थापित किया गया है। यह प्लांट गाय के गोबर और अन्य कचरे से सीबीजी गैस तैयार कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार प्लांट को प्रतिदिन 2 टन सीबीजी उत्पादन क्षमता के हिसाब से तैयार किया गया है। अभी लगभग 1500 किलोग्राम उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है और इसे पूरी क्षमता तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नगर निगम द्वारा इस गैस को आरएसजीएल (गेल) कंपनी को 74 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा है। इससे निगम को लगातार आय प्राप्त हो रही है।
सीएनजी प्लांट से गैस के साथ-साथ लगभग 8 टन जैविक खाद का भी प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। यही कारण है कि इसे केवल गैस परियोजना नहीं बल्कि बहुउपयोगी मॉडल माना जा रहा है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने निरीक्षण के दौरान जैविक खाद की पैकेजिंग और विक्रय पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि इससे अतिरिक्त आय का रास्ता तैयार हो सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु

सीएनजी प्लांट का निर्माण इंडियन ऑयल कंपनी द्वारा सीएसआर योजना के तहत कराया गया है। इस परियोजना पर 31 करोड़ रुपये की लागत आई है।
नगर निगम ने प्लांट संचालन के लिए एक कंपनी को जिम्मेदारी दी है। संचालन व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि गैस उत्पादन लगातार जारी रह सके।
जानकारी के अनुसार लगभग सवा साल के भीतर इस प्लांट से 3 लाख 5 हजार 435 किलोग्राम बायो गैस का उत्पादन किया जा चुका है।
इस उत्पादन की बिक्री से नगर निगम को लगभग 2 करोड़ 26 लाख रुपये की आय हुई है। यही आंकड़ा इस परियोजना को आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा है।
सीएनजी प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे पवैया ने पूरी प्रक्रिया को देखा और अधिकारियों से उत्पादन व संचालन को लेकर जानकारी ली।
विस्तृत जानकारी
ग्वालियर की लालटिपारा गौशाला लंबे समय से गौवंश प्रबंधन के लिए जानी जाती रही है। अब यहां स्थापित सीएनजी प्लांट ने इसे नई पहचान दिलाई है।
इस प्लांट में गाय के गोबर और अन्य कचरे का उपयोग कर बायो गैस तैयार की जाती है। इसके बाद तैयार गैस को आगे उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रतिदिन हो रहे उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम जारी है। प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
सीएनजी प्लांट को प्रदेश के बड़े प्लांट्स में शामिल माना जा रहा है। यही वजह है कि इसे देखने और समझने के लिए विभिन्न स्तरों पर रुचि दिखाई जा रही है।
जयभान सिंह पवैया ने प्लांट के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण करते हुए गैस उत्पादन प्रक्रिया को समझा। उन्होंने अधिकारियों से प्लांट की आय और उपयोगिता को लेकर भी चर्चा की।
निरीक्षण के समय मौजूद अधिकारियों ने बताया कि गैस उत्पादन के साथ तैयार हो रही जैविक खाद की मांग भी बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए पैकेजिंग व्यवस्था पर चर्चा हुई।
पवैया ने कहा कि उत्कृष्ट जैविक खाद को व्यवस्थित तरीके से पैक कर विक्रय किया जाना चाहिए। इससे प्लांट की उपयोगिता और अधिक बढ़ सकती है।
सीएनजी प्लांट का मॉडल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं दिखाई देता। इसमें कचरे के उपयोग, गैस निर्माण और खाद उत्पादन को एक साथ जोड़ा गया है।
नगर निगम द्वारा गैस विक्रय से प्राप्त हो रही आय ने इस परियोजना को आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
गैस उत्पादन के लिए गोबर और कचरे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे गौशाला प्रबंधन को भी सुविधा मिल रही है।
सीएनजी प्लांट के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उत्पादन आंकड़ों और आय संबंधी जानकारी भी साझा की। इसी दौरान यह सामने आया कि लगभग सवा साल में करोड़ों रुपये की आय प्राप्त हुई है।
ग्वालियर नगर निगम के लिए यह परियोजना आय के नए स्रोत के रूप में सामने आई है। साथ ही जैविक खाद उत्पादन से अलग संभावनाएं भी तैयार हुई हैं।
सीएनजी प्लांट में तैयार गैस को आरएसजीएल (गेल) कंपनी को विक्रय किया जा रहा है। यह प्रक्रिया नियमित रूप से जारी है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से कहा कि प्लांट की क्षमता का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
इस दौरान गौशाला की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने गौवंश प्रबंधन और प्लांट संचालन की जानकारी साझा की।
सीएनजी प्लांट की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि यह गोबर और कचरे के उपयोग का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय सहित संबंधित अधिकारियों ने भी प्लांट की मौजूदा स्थिति और आगे की योजनाओं पर जानकारी दी।
गौशाला परिसर में बने इस प्लांट को देखने के बाद पवैया ने इसे देश और प्रदेश के लिए अनुपम उदाहरण बताया।
निरीक्षण के बाद राज्य वित्त आयोग की टीम गौशाला परिसर में भी पहुंची। यहां गौ पूजन कार्यक्रम आयोजित हुआ।
जयभान सिंह पवैया और अन्य सदस्यों ने गौवंश का पूजन किया और उन्हें गुड़, तिल व सब्जियां खिलाईं।
गौ पूजन के बाद आदर्श गौशाला के संत ऋषभ देवानंद जी से चर्चा भी हुई। इस दौरान गौशाला के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत की गई।
पवैया ने गौशाला के विकास में हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
सीएनजी प्लांट का निर्माण इंडियन ऑयल कंपनी द्वारा सीएसआर योजना के अंतर्गत कराया गया है। परियोजना पर 31 करोड़ रुपये की लागत आई है।
यह परियोजना अब नगर निगम के लिए आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। गैस और जैविक खाद दोनों से आय की संभावनाएं बनी हुई हैं।
ग्वालियर में स्थापित यह सीएनजी प्लांट अब प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने के बाद उत्पादन में और बढ़ोतरी हो सकती है।
सीएनजी प्लांट से तैयार गैस की बिक्री लगातार जारी है और इससे निगम की आय में योगदान मिल रहा है।
गौशाला और प्लांट का संयुक्त मॉडल नगर निगम के लिए नई व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान राज्य वित्त आयोग के सदस्यों ने प्लांट की विभिन्न तकनीकी व्यवस्थाओं को भी देखा।
जैविक खाद उत्पादन को लेकर भी अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रतिदिन लगभग 8 टन खाद तैयार हो रही है।
यह खाद कृषि उपयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी कारण पैकेजिंग और विक्रय की बात सामने आई।
सीएनजी प्लांट को लेकर नगर निगम का प्रयास है कि इसे पूरी क्षमता के साथ चलाया जाए ताकि उत्पादन और आय दोनों बढ़ सकें।
विश्लेषण

सीएनजी प्लांट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गौशाला से निकलने वाले गोबर और कचरे का उपयोग किया जा रहा है। इससे एक साथ कई व्यवस्थाएं जुड़ गई हैं।
एक तरफ गैस उत्पादन हो रहा है तो दूसरी तरफ जैविक खाद तैयार हो रही है। यही कारण है कि इस मॉडल को उपयोगी व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
नगर निगम को गैस विक्रय से मिली 2 करोड़ 26 लाख रुपये की आय इस परियोजना की आर्थिक उपयोगिता को सामने लाती है।
सवा साल के भीतर 3 लाख 5 हजार 435 किलोग्राम बायो गैस उत्पादन का आंकड़ा भी इस प्लांट की कार्यक्षमता को दर्शाता है।
सीएनजी प्लांट की वर्तमान उत्पादन क्षमता 1500 किलोग्राम प्रतिदिन बताई गई है जबकि इसे 2 टन प्रतिदिन के हिसाब से तैयार किया गया है।
इसी वजह से अब पूरा फोकस प्लांट को पूर्ण क्षमता तक पहुंचाने पर दिखाई दे रहा है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष द्वारा जैविक खाद की पैकेजिंग का सुझाव इस परियोजना को और व्यापक बना सकता है।
यदि खाद का व्यवस्थित विक्रय शुरू होता है तो आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकते हैं।
सीएनजी प्लांट की चर्चा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौशाला प्रबंधन, गैस उत्पादन और आय सृजन को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल अलग पहचान बना रहा है।
प्रभाव
सीएनजी प्लांट से नगर निगम को आर्थिक लाभ मिलने लगा है। इससे निगम की आय में नई संभावना दिखाई दे रही है।
गौशाला में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर गैस और खाद तैयार होना इस परियोजना को विशेष बनाता है।
प्रतिदिन 8 टन जैविक खाद उत्पादन से अलग उपयोग की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के निरीक्षण के बाद यह परियोजना और अधिक चर्चा में आ गई है।
सीएनजी प्लांट को प्रदेश के बड़े प्लांट्स में शामिल किए जाने से इसकी पहचान और बढ़ी है।
नगर निगम द्वारा पूरी क्षमता से संचालन के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो उत्पादन में बढ़ोतरी संभव है।
गैस विक्रय व्यवस्था के चलते नियमित आय का स्रोत बना हुआ है।
गौशाला के साथ जुड़ी यह व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भविष्य की दिशा
सीएनजी प्लांट को पूरी क्षमता तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। नगर निगम का फोकस उत्पादन बढ़ाने पर बना हुआ है।
जैविक खाद की पैकेजिंग और विक्रय व्यवस्था आगे इस परियोजना को नई दिशा दे सकती है।
गैस उत्पादन और विक्रय प्रक्रिया को नियमित बनाए रखने के लिए संचालन व्यवस्था पर लगातार काम किया जा रहा है।
सीएनजी प्लांट के जरिए आय और संसाधन उपयोग दोनों को संतुलित करने की कोशिश दिखाई दे रही है।
गौशाला प्रबंधन और बायो गैस उत्पादन को साथ जोड़ने वाला यह मॉडल आगे भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
निष्कर्ष

ग्वालियर की आदर्श गौशाला लालटिपारा का सीएनजी प्लांट अब प्रदेश स्तर पर पहचान बना रहा है। गाय के गोबर और कचरे से गैस उत्पादन कर यह परियोजना अलग उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद इस परियोजना की चर्चा और बढ़ गई है।
2 करोड़ 26 लाख रुपये की आय, 3 लाख 5 हजार 435 किलोग्राम गैस उत्पादन और प्रतिदिन 8 टन जैविक खाद जैसे आंकड़े इस प्लांट की उपयोगिता को सामने लाते हैं।
नगर निगम अब इस सीएनजी प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने की दिशा में काम कर रहा है।
ऐसी ही ग्वालियर और प्रदेश की बड़ी खबरों के लिए राजधानी सामना से जुड़े रहें और वीडियो अपडेट देखने के लिए हमारा यूट्यूब चैनल जरूर देखें।