जल गंगा अभियान में ढिलाई पर सख्त एक्शन के निर्देश
भूमिका
ग्वालियर जिले में जल गंगा अभियान को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। जल गंगा अभियान के तहत निर्माणाधीन जल संरचनाओं को समय पर पूरा करने और बारिश के पानी को सहेजने की दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
जल गंगा अभियान की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अधिकारी अभियान में ढिलाई बरतेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अंतरविभागीय समन्वय बैठक में शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों के साथ बाढ़ प्रबंधन, किसान कल्याण, समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन और फार्मर आईडी जैसे विषयों पर भी विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्य तथ्य
कलेक्ट्रेट के स्व. टी धर्माराव सभागार में आयोजित बैठक में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जल गंगा अभियान की विभागवार समीक्षा की। जिन विभागों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई उनके अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी वाटरशेड, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास और अपर आयुक्त नगर निगम के कार्यों पर नाराजगी जाहिर की गई।
बैठक के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि जल गंगा अभियान के प्रति लगातार उदासीनता के चलते जिला पंचायत की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शाखा के उपयंत्री पंकज पाठक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
कलेक्टर ने कहा कि निर्माणाधीन जल संरचनाओं को जल्द पूरा करना बेहद जरूरी है ताकि इस वर्ष की बारिश का पानी संरक्षित किया जा सके।
महत्वपूर्ण बिंदु

बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल, बाढ़ प्रबंधन कार्ययोजना, सीएम हेल्पलाइन, समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन और किसान कल्याण वर्ष के तहत चल रही गतिविधियों की समीक्षा की गई।
फार्मर आईडी और सांदीपनि स्कूलों से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित कार्यों में तेजी लाई जाए।
बैठक में अपर कलेक्टर श्री कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत, एडीएम श्री सी बी प्रसाद सहित जिले के एसडीएम और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने कहा कि आगामी मानसून को देखते हुए जिले में बाढ़ और जल भराव की संभावित स्थितियों के लिए पहले से तैयारियां जरूरी हैं।
उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल भराव वाले इलाकों की सूची अपडेट करें और राहत एवं बचाव की तैयारी पहले से सुनिश्चित करें।
विस्तृत जानकारी
जल गंगा अभियान की समीक्षा बैठक में प्रशासन की प्राथमिकता साफ नजर आई। कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन जल संरचनाओं का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है क्योंकि बारिश के पानी को सहेजने का यही सही समय है। यदि संरचनाएं समय पर तैयार नहीं हुईं तो इसका सीधा असर जल संरक्षण के प्रयासों पर पड़ेगा।
बैठक में अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि जो विभाग अभियान में रुचि नहीं दिखाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जल गंगा अभियान की प्रगति धीमी पाए जाने पर कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं चलेगी।
बैठक में बताया गया कि उदासीनता के कारण उपयंत्री पंकज पाठक की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
बाढ़ प्रबंधन को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि मानसून के दौरान जल भराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिला और तहसील स्तर पर 15 जून से बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए जाएं जो 24 घंटे काम करें।
इसके साथ ही नगर निगम, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को नालों और ड्रेनेज सिस्टम की साफ-सफाई कराने के निर्देश भी दिए गए। जल निकासी में आने वाले अवरोधों को अभियान चलाकर हटाने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने कहा कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुरक्षित भवनों, स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों का चयन पहले से कर लिया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को वहां सुरक्षित ठहराया जा सके।
उन्होंने इन स्थानों पर बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
होमगार्ड और आपदा प्रबंधन टीम को नाव, लाइफ जैकेट और अन्य रेस्क्यू उपकरणों के साथ तैयार रखने को कहा गया।
राहत और बचाव कार्यों के लिए जरूरी सामग्री तथा स्थानीय गोताखोरों की सूची तैयार करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।
बरसात के दौरान जिन पुल-पुलियों पर पानी ओवर फ्लो होता है वहां ड्रॉप गेट और चेतावनी सूचना पट लगाने के निर्देश दिए गए ताकि लोगों को खतरे से बचाया जा सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए।
खाद्य विभाग को आपात स्थिति के लिए खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रखने को कहा गया।
कलेक्टर ने मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया ताकि आपातकालीन स्थिति में संबंधित क्षेत्रों तक तुरंत सूचना पहुंचाई जा सके।
समर्थन मूल्य पर गेहूँ बेचने आने वाले किसानों की सुविधाओं पर भी बैठक में विशेष फोकस रहा। कलेक्टर ने कहा कि आगामी दिनों में बड़ी संख्या में किसान स्लॉट बुक कराकर खरीदी केंद्रों पर पहुंचेंगे।
उन्होंने निर्देश दिए कि खरीदी केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे किसानों से जल्द से जल्द खरीदी हो सके।
किसानों की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था लागू करने और पर्याप्त छाया, शीतल पेयजल, ओआरएस तथा शरबत की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
विश्लेषण

जल गंगा अभियान की समीक्षा से यह साफ है कि प्रशासन अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम भी चाहता है। अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
जल संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन दोनों विषय सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में प्रशासन इन मुद्दों को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है।
जल गंगा अभियान में निर्माणाधीन संरचनाओं को समय पर पूरा करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बारिश के पानी को सहेजने का अवसर सीमित समय के लिए होता है।
यदि समय पर काम नहीं हुआ तो जल संरक्षण की पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कलेक्टर ने विभागीय अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी।
बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों में राहत केंद्र, ड्रेनेज सफाई, नियंत्रण कक्ष और सूचना तंत्र जैसे बिंदुओं पर जोर देना प्रशासन की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।
इसके अलावा किसानों के लिए समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश यह दिखाते हैं कि प्रशासन किसान हितों को भी प्राथमिकता दे रहा है।
बैठक में फार्मर आईडी अभियान को अगले 8 दिन में पूरा करने के निर्देश दिए गए। इससे प्रशासन की समयबद्ध कार्यशैली भी सामने आती है।
स्कूलों के क्षतिग्रस्त भवनों में कक्षाएं नहीं लगाने और वैकल्पिक शासकीय भवनों में व्यवस्था करने के निर्देश बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता को दिखाते हैं।
अधिकारियों के मोबाइल में “परख ऐप” डाउनलोड कराकर निरीक्षण रिपोर्ट भरने के निर्देश डिजिटल निगरानी को मजबूत करने की दिशा में कदम माने जा रहे हैं।
जिले के बांधों और जलाशयों से पानी छोड़े जाने की पूर्व सूचना देने के निर्देश भी संभावित जोखिम को कम करने के प्रयास का हिस्सा हैं।
प्रभाव

जल गंगा अभियान में तेजी आने से जिले में जल संरक्षण की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि सभी निर्माणाधीन संरचनाएं समय पर पूरी होती हैं तो बारिश के पानी का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
बाढ़ और जल भराव वाले क्षेत्रों के लिए पहले से तैयार कार्ययोजना लोगों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है।
नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई होने से बारिश के दौरान जल निकासी में सुधार आने की संभावना है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों तथा नियंत्रण कक्षों की तैयारी आपदा के समय त्वरित कार्रवाई में मददगार साबित हो सकती है।
किसानों के लिए खरीदी केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
फार्मर आईडी अभियान में तेजी आने से शेष किसानों को भी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता आसान हो सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ने से अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती दिखाई दे रही है।
भविष्य की दिशा
आगामी दिनों में जल गंगा अभियान की प्रगति पर प्रशासन की नजर बनी रहने की संभावना है। जिन विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं उनसे जवाब तलब किया जाएगा।
मानसून से पहले बाढ़ नियंत्रण कक्षों को सक्रिय करने और राहत कार्यों की तैयारी पूरी करने पर जोर बना रहेगा।
ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए प्रशासनिक निगरानी बढ़ सकती है।
फार्मर आईडी और किसान कल्याण वर्ष से जुड़ी गतिविधियों को भी अगले दिनों में तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा।
जल गंगा अभियान के तहत प्रशासन का फोकस अब परिणाम आधारित कार्यप्रणाली पर नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
ग्वालियर में जल गंगा अभियान को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही अब स्वीकार नहीं होगी। निर्माणाधीन जल संरचनाओं को समय पर पूरा करने, बाढ़ प्रबंधन की तैयारी मजबूत करने और किसानों की सुविधाओं पर फोकस के साथ प्रशासन कई मोर्चों पर सक्रिय नजर आया।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। साथ ही विभिन्न विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने पर जोर दिया गया।
यदि निर्देशों का प्रभावी पालन होता है तो जल संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और किसान सुविधाओं के क्षेत्र में जिले को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
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