प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से ग्वालियर के 30 भवन चमके

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से ग्वालियर के 30 भवन चमके

भूमिका

ग्वालियर में “प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना” के तहत एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूर्य घर योजना के अंतर्गत शासकीय भवनों की छतों पर सोलर रूफ टॉप संयंत्र लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुबंध सम्पन्न हुए हैं।

इस योजना का उद्देश्य बिजली की बचत करना, शासकीय संस्थानों पर आर्थिक भार कम करना और शून्य निवेश मॉडल के जरिए ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। शुक्रवार को ग्वालियर कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में 30 शासकीय भवनों पर सोलर संयंत्र लगाने का अनुबंध किया गया।

प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला की उपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी हुई। कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य तथ्य

सूर्य घर योजना के अंतर्गत ग्वालियर जिले के 30 शासकीय भवनों पर सोलर रूफ टॉप संयंत्र लगाए जाएंगे। यह कार्य रेस्को पद्धति के माध्यम से किया जाएगा।

योजना के तहत दो मेगावाट क्षमता के सोलर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन संयंत्रों के लिए शासकीय संस्थाओं और एसएनएस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बीच विद्युत क्रय अनुबंध निष्पादित किए गए।

ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में एक वर्ष के भीतर सोलर रूफ टॉप संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए प्रत्येक जिले में नोडल एजेंसी नियुक्त की गई है।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

ग्वालियर कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में विधायक भितरवार श्री मोहन सिंह राठौर, विधायक ग्वालियर ग्रामीण श्री साहब सिंह गुर्जर, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मधुसूदन भदौरिया, ग्वालियर मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन और ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा भी उपस्थित रहे।

इसके अलावा कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, सौर ऊर्जा विभाग के एमडी श्री अमनवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय और सीईओ जिला पंचायत श्री सोजान सिंह रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

महत्वपूर्ण बिंदु

सूर्य घर योजना के अंतर्गत रेस्को पद्धति अपनाई जा रही है। इस पद्धति में शासन को संयंत्र स्थापना पर कोई खर्च नहीं करना होता।

शासकीय कार्यालय केवल उपयोग की गई ऊर्जा के लिए प्रति यूनिट भुगतान करेंगे। संयंत्र स्थापना और 25 वर्षों तक रखरखाव का पूरा दायित्व रेस्को विकासक इकाई का रहेगा।

योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू “शून्य निवेश, पहले दिन से बचत” मॉडल है। इससे सरकारी संस्थानों को बिजली खर्च में राहत मिलेगी।

ग्वालियर में जिन संस्थानों में संयंत्र स्थापित किए जाने हैं उनमें सेंट्रल जेल, जिला चिकित्सालय, खेल एवं युवा कल्याण विभाग और विजयाराजे शासकीय कन्या डिग्री कॉलेज शामिल हैं।

सेंट्रल जेल में 176 मेगावाट, जिला चिकित्सालय में 280 मेगावाट, खेल एवं युवा कल्याण विभाग अंतर्गत 100 मेगावाट और विजयाराजे शासकीय कन्या डिग्री कॉलेज में 50 मेगावाट क्षमता के सोलर रूफ टॉप संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम, एसएनएस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और हितग्राही संस्थाओं के बीच त्रि-स्तरीय अनुबंध निष्पादित किए गए।

विस्तृत जानकारी

"प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना"  प्रदेश के सभी शासकीय भवनों पर रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट स्थापित किए जायेंगे – नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ला  ग्वालियर के शासकीय भवनों में शून्य निवेश से बिजली की बचत : रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट के लिये हुए विद्युत क्रय अनुबंध

प्रदेश सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सूर्य घर योजना इसी प्रयास का हिस्सा है, जिसके माध्यम से सरकारी भवनों को ऊर्जा दक्ष बनाया जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के सभी शासकीय भवनों पर रेस्को परियोजना के अंतर्गत सोलर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इससे बिजली की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल एजेंसी नियुक्त की गई है ताकि योजना का क्रियान्वयन तेजी से किया जा सके।

योजना का फोकस केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिक से अधिक संयंत्र लगाने पर जोर दिया जा रहा है।

कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार की शासकीय भवनों पर सोलर संयंत्र लगाने की योजना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिले में अधिक से अधिक भवनों पर संयंत्र स्थापित करने की बात कही।

उन्होंने किसानों को भी योजना से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि किसानों के लिए सोलर पंप के आवेदन लेकर सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो अधिक लोगों को लाभ मिल सकता है।



विधायक भितरवार श्री मोहन सिंह राठौर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय भवनों को चिन्हित कर उनमें सोलर संयंत्र लगाए जाने चाहिए। इससे ग्रामीणों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

विधायक ग्वालियर ग्रामीण श्री साहब सिंह गुर्जर ने ग्रामीण अस्पतालों, आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में भी सोलर पैनल लगाने की आवश्यकता बताई।

ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मधुसूदन भदौरिया, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक जादौन और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा ने भी अपने संस्थानों में अधिक संयंत्र स्थापित करने की इच्छा जताई।

उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी और अधिकृत एजेंसी संयुक्त रूप से भ्रमण कर ऐसे स्थानों को चिन्हित करें जहां सोलर संयंत्र लगाए जा सकते हैं।

मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा रेस्को मोड में शासकीय भवनों को सौर उर्जीकृत करने की प्रक्रिया पहले से चलाई जा रही है।

ऊर्जा विकास निगम के एमडी श्री अमनवीर सिंह ने बताया कि 55 जिलों के लिए 48 मेगावॉट क्षमता वाले 1300 शासकीय भवनों हेतु जिलेवार निविदा जारी की गई।

निविदा प्रक्रिया में 17 विकासकों ने भाग लिया और 13 विकासकों का चयन किया गया। इसके बाद 47 जिलों के लिए कार्यादेश जारी किए गए।

निविदा में विभिन्न जिलों के लिए अलग-अलग दरें प्राप्त हुईं। इंदौर जिले के लिए 3.40 रुपए प्रति यूनिट, ग्वालियर जिले के लिए 3.49 रुपए प्रति यूनिट, भोपाल जिले के लिए 3.78 रुपए प्रति यूनिट और उज्जैन जिले के लिए 3.97 रुपए प्रति यूनिट की दर सामने आई।

अधिकतम दर 4.01 रुपए प्रति यूनिट प्राप्त हुई।

इससे पहले वर्ष 2018 से 2020 के बीच भी राज्य में 133 शासकीय कार्यालयों में RESCO पद्धति से सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाए जा चुके हैं।

इन संयंत्रों का संचालन पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

इनमें IIM Indore, CAPT भोपाल, शासकीय मेडिकल कॉलेज रीवा, शिवपुरी, खण्डवा, दतिया, विदिशा, सागर और ग्वालियर सहित कई संस्थान शामिल हैं।

NLIU भोपाल, AG कार्यालय ग्वालियर, SAI भोपाल और पावरग्रिड कॉरपोरेशन जैसे संस्थानों में भी यह मॉडल लागू किया जा चुका है।

विश्लेषण

"प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना"  प्रदेश के सभी शासकीय भवनों पर रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट स्थापित किए जायेंगे – नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ला  ग्वालियर के शासकीय भवनों में शून्य निवेश से बिजली की बचत : रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट के लिये हुए विद्युत क्रय अनुबंध

सूर्य घर योजना के तहत अपनाई गई रेस्को पद्धति सरकारी संस्थानों के लिए व्यावहारिक मॉडल के रूप में सामने आ रही है। इसमें प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता नहीं होने से सरकारी विभागों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ता।

सरकारी भवनों में लगातार बढ़ते बिजली खर्च को देखते हुए यह मॉडल दीर्घकालिक बचत का माध्यम बन सकता है।

रेस्को मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संयंत्र स्थापना और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी विकासक इकाई की होती है। इससे विभागों को तकनीकी संचालन की अलग व्यवस्था नहीं करनी पड़ती।

25 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी तय होने से परियोजना की निरंतरता बनी रहती है।

प्रदेश सरकार द्वारा एक जिला-एक रेस्को मॉडल पर काम करना योजना के विस्तार को दर्शाता है। 55 जिलों के लिए निविदा जारी होना और 47 जिलों में कार्यादेश मिलना इस दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।



ग्वालियर में 30 शासकीय भवनों को शामिल किया जाना यह संकेत देता है कि योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

सोलर ऊर्जा के उपयोग से बिजली बचत के साथ पर्यावरणीय लाभ भी जुड़े हुए हैं। हालांकि कार्यक्रम में मुख्य फोकस बिजली बचत और शून्य निवेश मॉडल पर ही रहा।

योजना में ग्रामीण क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्र, अस्पताल और स्कूल जैसे संस्थानों में सोलर संयंत्र लगाने के सुझाव इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

किसानों के लिए सोलर पंप सुविधा की बात भी योजना के विस्तार की संभावना को दर्शाती है।

सूर्य घर योजना के माध्यम से सरकारी भवनों की ऊर्जा जरूरतों को वैकल्पिक माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रभाव

ग्वालियर जिले में इस योजना का सीधा प्रभाव शासकीय भवनों की बिजली व्यवस्था पर दिखाई देगा। सोलर संयंत्र लगने के बाद बिजली की बचत में मदद मिलेगी।

शून्य निवेश मॉडल के कारण विभागों को शुरुआत में आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इससे अधिक संस्थानों को योजना से जोड़ना आसान हो सकता है।

सोलर संयंत्रों के जरिए लंबे समय तक ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में सोलर ऊर्जा उपयोग होने से बिजली आपूर्ति संबंधी व्यवस्था अधिक मजबूत हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में यदि अधिक भवनों को शामिल किया जाता है तो वहां भी ऊर्जा बचत के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं।

योजना का प्रभाव केवल सरकारी भवनों तक सीमित नहीं रह सकता। इससे निजी और सामाजिक संस्थाओं में भी सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना है।

पूर्व में लगाए गए 133 संयंत्रों के सफल संचालन का उल्लेख इस परियोजना के अनुभव और निरंतरता को दर्शाता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि रेस्को मॉडल को पहले भी लागू किया जा चुका है और अब इसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

भविष्य की दिशा

प्रदेश सरकार ने एक वर्ष में सभी शासकीय कार्यालयों में सोलर रूफ टॉप संयंत्र लगाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य योजना की व्यापकता को दर्शाता है।

जिलेवार नोडल एजेंसी नियुक्त होने से क्रियान्वयन प्रक्रिया में गति आने की संभावना है।

ग्वालियर जिले में जिन संस्थानों के लिए अनुबंध किए गए हैं, उनके बाद अन्य भवनों को भी चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और आंगनबाड़ी भवनों को सोलर प्रणाली से जोड़ने के सुझावों पर आगे कार्य होने की संभावना दिखाई दे रही है।

किसानों के लिए सोलर पंप आवेदन की सुविधा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा सामने आई है।

रेस्को मॉडल के तहत भविष्य में और अधिक विकासक इकाइयों को जोड़ा जा सकता है ताकि योजना का विस्तार तेजी से हो सके।

प्रदेश में पहले से संचालित परियोजनाओं के अनुभव का उपयोग नई परियोजनाओं में किया जाएगा।

सूर्य घर योजना के माध्यम से ऊर्जा बचत और शासकीय संस्थानों में सौर ऊर्जा उपयोग का दायरा लगातार बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी रहने के संकेत मिले हैं।

निष्कर्ष

"प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना"  प्रदेश के सभी शासकीय भवनों पर रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट स्थापित किए जायेंगे – नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ला  ग्वालियर के शासकीय भवनों में शून्य निवेश से बिजली की बचत : रेस्को परियोजना अंतर्गत सोलर प्लांट के लिये हुए विद्युत क्रय अनुबंध

ग्वालियर में “प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना” के तहत 30 शासकीय भवनों पर सोलर रूफ टॉप संयंत्र लगाने की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेस्को पद्धति के जरिए शून्य निवेश मॉडल अपनाकर बिजली बचत की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रदेश सरकार ने एक वर्ष में सभी शासकीय भवनों में सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जिलेवार एजेंसियों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

पूर्व में सफलतापूर्वक संचालित परियोजनाओं के आधार पर अब इस योजना को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

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